शासकीय दिग्विजय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय राजनांदगाव (छत्तीसगढ़) के मानव संसाधन विकास प्रकोष्ठ (HRDC) एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के सहयोग सेसे आयोजित एक सप्ताहीय फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम “उच्च शिक्षा में नैतिक एआई एकीकरण: अवसर एवं चुनौतियाँ” के अंतर्गत पंचम दिवस का आयोजन अत्यंत सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम का उद्देश्य उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के नैतिक, प्रभावी एवं व्यावहारिक उपयोग को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम के पाँचवें दिन का मुख्य आकर्षण “AI & Machine Learning” विषय पर आयोजित विशेषज्ञ व्याख्यान रहा। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में प्रो सुरेश कुमार ठाकुर आई.जी. शासकीय महाविद्यालय, भिलाई (छत्तीसगढ़) के प्रख्यात शिक्षाविद् एवं विषय विशेषज्ञ उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि के स्वागत से हुआ, जिसमें डॉ. पी. बी. टौंक द्वारा मुख्य वक्ता का आत्मीय स्वागत किया गया।
अपने व्याख्यान में प्रो. सुरेश कुमार ठाकुर ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) एवं मशीन लर्निंग (Machine Learning) की मूलभूत अवधारणाओं को सरल एवं प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि एआई ऐसी तकनीक है, जिसके माध्यम से मशीनें मानव बुद्धिमत्ता की तरह कार्य करने में सक्षम होती हैं, जबकि मशीन लर्निंग एआई का एक महत्वपूर्ण भाग है, जिसमें कंप्यूटर सिस्टम डेटा से सीखकर अपने कार्यों में सुधार करते हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एआई एवं मशीन लर्निंग के उपयोग पर विशेष प्रकाश डालते हुए बताया कि इन तकनीकों के माध्यम से शिक्षण प्रक्रिया को अधिक स्मार्ट, व्यक्तिगत एवं परिणामोन्मुख बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि एआई आधारित प्लेटफॉर्म छात्रों की सीखने की क्षमता का विश्लेषण कर उन्हें व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्रदान कर सकते हैं, जिससे उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों में सुधार संभव है।
प्रो. ठाकुर ने यह भी बताया कि मशीन लर्निंग एल्गोरिद्म के माध्यम से बड़े डेटा (Big Data) का विश्लेषण कर शैक्षणिक नीतियों एवं निर्णयों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। उन्होंने वर्चुअल क्लासरूम, स्मार्ट असेसमेंट सिस्टम, चैटबॉट्स एवं ऑटोमेटेड कंटेंट जनरेशन जैसे आधुनिक उपकरणों की भूमिका को भी विस्तार से समझाया। उन्होंने एआई के उपयोग से जुड़ी चुनौतियों जैसे डेटा गोपनीयता, नैतिकता, तकनीकी असमानता एवं मानव संसाधन के प्रशिक्षण की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि एआई का उपयोग करते समय नैतिक मूल्यों एवं जिम्मेदारी का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है, ताकि इसका उपयोग समाज के हित में किया जा सके। व्याख्यान के दौरान प्रतिभागियों ने अत्यंत उत्साह के साथ सहभागिता करते हुए अपने प्रश्न प्रस्तुत किए, जिनका उत्तर प्रो. ठाकुर ने सरल एवं स्पष्ट रूप से दिया। इस संवादात्मक सत्र ने कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी एवं ज्ञानवर्धक बना दिया। कार्यक्रम का संचालन वंदना मिश्रा द्वारा अत्यंत कुशलतापूर्वक किया गया। उनकी प्रभावशाली प्रस्तुति शैली ने पूरे कार्यक्रम को व्यवस्थित एवं आकर्षक बनाए रखा। कार्यक्रम के अंत में मुख्य वक्ता को महाविद्यालय परिवार की ओर से प्रमाण-पत्र एवं “कृतज्ञता स्वरूप सम्मान” प्रदान किया गया।