शासकीय दिग्विजय स्वशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय, राजनांदगाँव में आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (IQAC) के तत्वावधान में “Advanced Laboratory Instruments for Higher Education Institutions” विषय पर आयोजित सात दिवसीय राष्ट्रीय स्तरीय गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ दिनांक 06 मार्च 2026 को किया गया कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ सुचित्रा गुप्ता के कुशल नेतृत्व में तथा IQAC के संयोजक प्रोफेसर यूनुस रज़ा बेग के मार्गदर्शन में किया जा रहा है।कार्यक्रम के प्रारंभ में IQAC समन्वयक प्रो. यूनुस रज़ा बेग ने कार्यक्रम की रूपरेखा को विस्तृत रूप में बताया ।अपने संबोधन में कहा कि यह कार्यशाला उच्च शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ शासन द्वारा प्रायोजित है ।यह कार्यशाला अत्यंत व्यापक एवं उपयोगी होने वाली है। इस प्रशिक्षण के माध्यम से प्रतिभागियों को विभिन्न प्रयोगशाला उपकरणों की उपयोगिता, उनके रखरखाव तथा उनके वैज्ञानिक प्रयोगों में प्रभावी उपयोग के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त होगी। यह प्रशिक्षण विद्यार्थियों, प्राध्यापकों ,लैब टेक्नीशियन और लैब अटेंडेंट के लिए आयोजित है ।उन्होंने सभी प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाएं।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सुचित्रा गुप्ता ने कहा कि किसी भी शैक्षणिक संस्थान की प्रयोगशाला वहाँ की अनुसंधान संस्कृति और नवाचार की भावना का महत्वपूर्ण संकेतक होती है। समाज और राष्ट्र का विकास अनुसंधान तथा नवाचार के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री द्वारा परिकल्पित “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को साकार करने में शैक्षणिक संस्थानों की प्रयोगशालाओं में होने वाला नवाचार और अनुसंधान अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।कार्यशाला के प्रथम तकनीकी सत्र में प्रतिष्ठित वक्ता Mr. Digamber Singh ,Proprietor, ALFA Scientific, भिलाई ने “Maintenance of General Laboratory Equipments & Instruments” विषय पर विस्तृत व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय वैज्ञानिक दृष्टिकोण अर्थात Scientific Temper का युग है, जिसमें यह समझना अत्यंत आवश्यक है कि कौन-सा उपकरण किस उद्देश्य के लिए प्रयोग किया जाता है और उसका उचित रखरखाव किस प्रकार किया जाए। उन्होंने प्रयोगशालाओं में उपयोग होने वाले विभिन्न सामान्य उपकरणों के रखरखाव, उनकी कार्यक्षमता बनाए रखने तथा प्रयोगशाला सुरक्षा के महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी प्रकाश डाला।द्वितीय तकनीकी सत्र में मुख्य वक्ता डॉ . प्रज्ञा कुलकर्णी ने UV–Visible Spectrophotometer विषय पर विस्तृत व्याख्यान दिया। उन्होंने इस उपकरण के सिद्धांत, उसकी संरचना, ऑप्टिकल सिस्टम, इंस्ट्रूमेंटेशन तथा विभिन्न वैज्ञानिक एवं शोध कार्यों में इसके अनुप्रयोगों को विस्तार से समझाया। उनके व्याख्यान से प्रतिभागियों को इस महत्वपूर्ण विश्लेषणात्मक उपकरण की कार्यप्रणाली और उपयोगिता के बारे में गहन जानकारी प्राप्त हुई।कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में प्रतिभागियों को प्रयोगशाला में Hands-on Training भी प्रदान की गई, जिसमें उन्हें उपकरणों के वास्तविक संचालन, उनके उपयोग की प्रक्रिया तथा सावधानियों के बारे में व्यावहारिक रूप से प्रशिक्षित किया गया। इस सत्र ने प्रतिभागियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान किया। इस कार्यशाला के आयोजन में विशेष सहयोग रजिस्टार दीपक परगनिया एवं श्रीमती मंजूषा बाजपेयी का रहा ।कार्यक्रम का सफल संचालन सहायक प्राध्यापक डॉ. डी.के. वर्मा द्वारा किया गया तथा अंत में डॉ त्रिलोक द्वारा सभी अतिथियों, प्राध्यापकगण ,सहायक प्राध्यापकगण ,कर्मचारीगण एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया ।