’शासकीय दिग्विजय स्वशासी महाविद्यालय, राजनांदगांव में दो दिवसीय कार्यशाला का सफल आयोजन’
’’इनक्यूबेशन और स्टार्टअप इकोसिस्टमरू राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की आवश्यकता’’
शासकीय दिग्विजय स्वशासी महाविद्यालय में इनक्यूबेशन सेल के तत्वावधान में इनक्यूबेशन और स्टार्टअप इकोसिस्टम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की आवश्यकता विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सुचित्रा गुप्ता के निर्देशन में आयोजित इस कार्यशाला का उद्देश्य छात्रों में उद्यमिता की भावना जगाना, नवाचार को प्रोत्साहित करना तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अंतर्गत उच्च शिक्षा संस्थानों में स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित करने की आवश्यकता पर प्रकाश डालना था।
इस कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में डाॅ. आर.एन. पटेल (एन आई टी, रायुपर), डॉ. मयंक पांडे जीजीवी बिलासपुर, श्री अर्पित चैहान, एर्की मोटर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड बिलासपुर, आकार्षण सिंह जीजीवी, बिलासपुर, श्री रूपेश चैबे ग्रामाद्योग पदुमतरा मुख्य वक्ता के रूप उपस्थित थे।
प्राचार्य डॉ.सुचित्रा गुप्ता के निर्देशन में इनक्यूबेशन सेल के समन्वयक डॉ. केशव राम आडिल, कार्यशाला के आयोजन सचिव वंदना मिश्रा, एवं श्री लिकेश्वर सिन्हा के मार्गदर्शन में इनक्यूबेशन और स्टार्टअप इकोसिस्टम विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्वलन कर किया गया।
कार्यशाला के प्रथम दिन समन्वयक डॉ. केशव राम आडिल ने विषय की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा वर्तमान परिदृश्य में इसकी प्रासंगिकता बताई। प्राचार्य डॉ. सुचित्रा गुप्ता ने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए स्टार्टअप को अत्यंत आवश्यक मानती है। उन्होंने जोर दिया की कोई भी शोध यदि केवल प्रयोगशाला तक सीमित रहेगा तो उसका कोई औचित्य नहीं है। शोध तभी सार्थक होता है जब वह वास्तविक जीवन की समस्याओं का समाधान करे। उन्होंने विद्यार्थियों को कौशल विकास पर बल देते हुए बेहतर जीवन-यापन के लिए उद्यमिता अपनाने की सलाह दी।
प्रथम दिवस के मुख्य वक्ता डॉ. मयंक पांडे (जीजीवी, बिलासपुर) ने परंपरागत व्यापार एवं स्टार्टअप में नवाचार के अंतर को स्पष्ट किया तथा कहा कि स्टार्टअप समाज में क्रांति लाता है। यदि हर व्यक्ति अपने कौशल को रोजगार में बदल ले तो सफलता अवश्य मिलेगी। उन्होंने स्टार्टअप में सफलता के लिए महाभारत के पांच पांडवों के सिद्धांत का उदाहरण दिया युधिष्ठिर की सत्यनिष्ठा, अर्जुन का लक्ष्य-केंद्रित दृष्टिकोण, भीम की मेहनत, तथा नकुल-सहदेव की चतुराई एवं चालाकी।
विशिष्ट अतिथि अर्पित चैहान (फाउंडर एवं सीईओ, ऐर्की मोटर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड बिलासपुर) ने अपनी उद्यमिता यात्रा की मार्मिक कहानी साझा की। उन्होंने असफलताओं को सफलता में बदलने की प्रक्रिया, चुनौतियों का सामना तथा विश्वसनीय टीम के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप तभी सफल होता है जब वह समाज की किसी समस्या का समाधान प्रस्तुत करे।
द्वितीय दिन के समापन सत्र में मुख्य अतिथि डॉ. आर. एन. पटेल (एनआईटी, रायपुर) ने मेंटरशिप की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि किसी भी स्टार्टअप या व्यापार के लिए मेंटरशिप अनिवार्य है। इन्वेंशन तभी इनोवेशन बनता है जब वह बाजार से जुड़कर व्यापार करता है। उन्होंने स्टार्टअप को समाज की आवश्यकताओं को पहचानकर अवसर सृजन करने की प्रक्रिया बताया तथा कुशल टीम एवं बाजार जुड़ाव के बिना सफलता मुश्किल होने की बात कही।
विशिष्ट अतिथि रुपेश कुमार चैबे (गोकुल ग्रामोद्योग, पदुमतरा) ने उद्यमिता की परिभाषा देते हुए कहा कि नया एवं समाज के लिए उपयोगी विचार ही उद्यमिता है। परंपरागत उत्पादों को नवीन रूप देकर जन-उपभोग के लिए उपलब्ध कराना उद्यमिता है। उन्होंने स्टार्टअप इंडिया स्कीमों के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता तथा अपने मशरूम उद्योग की तकनीकी प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की।
प्राचार्य डॉ. गुप्ता ने समापन पर कहा कि सीमित साधनों में सकारात्मक संसाधनों का निर्माण ही स्टार्टअप है।
कार्यक्रम का संचालन वंदना मिश्रा एवं लिकेश्वर सिन्हा ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक/सहायक प्राध्यापक श्री हिरेन्द्र बहादुर ठाकुर, प्रियंका दास, कौशिक बिशी, अमितेश सोनकर, श्री मुकेश तैम्बुरकर,श्री योगेश्वर कुमार सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कार्यशाला ने छात्रों में उद्यमिता, नवाचार एवं आत्मनिर्भरता की भावना को मजबूत किया तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के लक्ष्यों उच्च शिक्षा में इनक्यूबेशन सेंटर स्थापित कर स्टार्टअप इकोसिस्टम विकसित करने को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।