शोध अगर केवल लैब तक सीमित रहेगा तो उसका कोई औचित्य नहीं है : प्राचार्य डॉ.सुचित्रा गुप्ता
स्टार्टअप समाज में क्रांति लाता है : डॉ. मयंक पांडे
अपनी असफलताओं को सफलता में बदलना ही स्टार्टअप है : अर्पित चौहान
स्टार्टअप में हर उद्यमी को पांच पांडवों के सिद्धांत के अनुसार कार्य करने की प्रेरित किया
राजनांदगांव। शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.सुचित्रा गुप्ता के निर्देशन में इनक्यूबेशन सेल के समन्वयक डॉ. केशव राम आडिल , कार्यशाला के आयोजन सचिव वंदना मिश्रा, एवं लिकेश्वर सिन्हा के मार्गदर्शन में "इनक्यूबेशन और स्टार्टअप इकोसिस्टम" विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्वलन कर किया गया।
कार्यशाला की अध्यक्षता महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. सुचित्रा गुप्ता, मुख्य वक्ता - जीजीवी, बिलासपुर (सी.जी.) डॉ. मयंक पांडे, विशिष्ट वक्ता - एर्की मोटर्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, फाउंडर एंड सीईओ, अर्पित चौहान, जीजीवी, बिलासपुर आकाश सिंह उपस्थित थे।
समन्वयक डॉ. आडिल ने कार्यशाला के विषय वस्तु एवं रूपरेखा को प्रस्तुत किया और वर्तमान में इसकी आवश्यकता एवं प्रासंगिकता को बताया।
प्राचार्य डॉ. गुप्ता ने कहा कि एनईपी 2020 में विकसित एवं आत्मनिर्भर भारत के लिए स्टार्टअप बहुत ही आवश्यक है। वर्तमान में विद्यार्थियों के लिए अपने बेहतर जीवन यापन के लिए कौशल का होना अति आवश्यक है। कोई भी शोध अगर केवल लैब तक सीमित रहेगा तो उसका कोई औचित्य नहीं है वह तभी कारगर होगा जब वह वास्तविक जीवन में काम आएगा।
डॉ. मयंक पांडे ने स्टार्टअप की आवश्यकताओं और परंपरागत व्यापार व स्टार्टअप में नवाचार के बारे में बताते हुए कहा कि परंपरागत व्यापार व स्टार्टअप में नवाचार को बहुत ही उपयोगी ढंग से स्टार्टअप समाज में क्रांति लाता है अगर हर व्यक्ति अपने कौशल को रोजगार बना लेगा तो वह एक दिन जरुर सफल हो जाएगा। स्टार्टअप में हर उद्यमी को पांच पांडवों के सिद्धांत के अनुसार कार्य करने की प्रेरित किया। जिसमें उद्यमी को युधिष्ठिर की भांति सत्य निष्ठ, अर्जुन के भांति लक्ष्य केंद्रित, भीम के भांति मेहनतकश और नकुल सहदेव के भांति चतुर एवं चालक बनने के लिए कहा जो व्यापार को आगे ले जाएंगे।
अर्पित चौहान ने ऐर्की मोटर कंपनी स्थापित करने में अपने सोच को कंपनी एवं सफल व्यवसाय के रूप में बदलने में आने वाली तमाम चुनौतियों को किस प्रकार से सामना किया उसे पूरी जर्नी को बहुत ही मार्मिक ढंग से भावुक होते हुए बताया कितने संघर्ष एवं असफलताओं का सामना किया तथा कैसे उसका समाधान निकाला इन सभी चीजों को विद्यार्थियों से साझा किया। वहीं चौहान ने बताया कि किसी भी स्टार्टअप के लिए एक बेहतर सोच के साथ-साथ भरोसेमंद टीम का होना अति आवश्यक है कोई भी स्टार्टअप तभी सफल हो पाएगा जब वह समाज की कोई समस्या को समाधान करने वाला होगा।
कार्यक्रम का संचालन वंदना मिश्रा और लिकेश्वर सिन्हा ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ. मीना प्रसाद, डॉ. त्रिलोक कुमार, डॉ, सोनल मिश्रा, डॉ साकरे, डॉ, प्रवीण साहू, प्रियंका दास, कौशिक बिनी, डॉ मनीषा यादव, अमितेश सोनकर, एवं भारी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।