भूगोल विभाग में ऑनलाइन अभिभावक एवं शिक्षक मीटिंग का आयोजन

शा. दिग्विजय स्वाशासी स्नातकोत्तर महाविद्यालय के भूगोल विभाग में ऑनलाइन क्लासेस के सन्दर्भ में आज दिनाँक 19.04.2021 को 12:00 बजे से अभिभावक एवं शिक्षक के मध्य मीटिंग का आयोजन गूगल मीट के माध्यम किया गया। जिसमे एम. ए. प्रथम एवं तृतिय सेमेस्टर के विद्यार्थियों एवं उनके अभिभावकों से भूगोल विभाग के अध्यक्ष एवं शिक्षको ने विधार्थीयो के कक्षा शिक्षण, पाठ्यक्रम पूर्णता एवं विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकाश से सम्बंधित विषयो पर पलकों से बात की इसके साथ ही पेरेंट्स एवं टीचर के मध्य निम्नलिखित बिंदुओं के अंतर्गत वार्तालाप संपन्न हुआ।

1 . लॉकडाउन के दौरान अभिभावक ने अपने बच्चो के बेहतर शिक्षा के लिए शिक्षको को धन्यवाद दिया।

  1. ऑनलाइन शिक्षण प्रणाली को और बेहतर बनाने हेतु अभिभावकों ने अपने सुझाव एवं अनुभव साझा किए।
  2. शिक्षको ने करोना आपदा के चलते अभिभावक एवं शिक्षको को सावधानी बरतने एवं ऑनलाइन शिक्षण हेतु अपनी जागरूकता बढ़ाने की अपील की।

4 . अभिभावकों ने ऑनलाइन शिक्षण पद्ति को और अधिक प्रभावी बनाने हेतु सेमिनार एवं शिक्षा प्रणाली को और अधिक रुचिकर बना कर कोर्ष को पूर्ण करने का सुझाव रखे।

5 . शिक्षको के द्वारा भी पलकों से उनके बच्चो को ऑनलाइन शिक्षण प्रणाली में समय पर नियमित अनुशाशित रूप से क्लासेस अटेंड करने हेतु जागरूक करने की बात कही गई।

6 . विद्यार्थियों ने बचे हुए पाठ्यक्रम को नियमित ऑनलाइन कक्षाओं के माध्यम से पूर्ण करने की बात कही और साथ ही जब तक परीक्षा नहीं होती तब तक पाठ्यक्रम के कुछ बिंदुओं को फिर से दुहराने की बात रखी।

महिला विधिक जागरुकता पर एकदिवसीय कार्यशाला : ‘नारी प्रकृति की सबसे सुंदर रचना’

 

राष्ट्रीय महिला आयोग के सौजन्य से शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय, राजनांदगांव में एक दिवसीय महिला विधिक जागरुकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विषय विशेषज्ञों के द्वारा महिलाओं पर होने वाले उत्पीड़न एवं अत्याचार तथा उनके अधिकारों के हनन एवं कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न (2013) निवारण अधिनियम एवं कारखाना अधिनियम (1948) के अंतर्गत श्रम कानून पर कार्यशाला का मुख्य बिन्दू रहा। इस अवसर पर मुख्य अतिथि पद्मश्री फूलबासन यादव और प्राचार्य डाॅ. बी.एन. मेश्राम के अध्यक्षता में संपन्न हुई। कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ श्रीमती सुरेशा चैबे, ए.एस.पी. डाॅ. श्रीमांशु दास लाॅ प्रोफेसर, श्री शरद श्रीवास्तव ने राष्ट्रीय महिला आयोग भारत सरकार नई दिल्ली द्वारा आयोजित कार्यशाला में सहभागिता दी। स्वागत उद्बोधन एवं अध्यक्षीय भाषण में महाविद्यालय की प्राचार्य डाॅ. बी.एन. मेश्राम ने कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों का स्वागत किया एवं कहा कि महाविद्यालय प्रांगण में विधिक जागरुकता कार्यक्रम भारत सरकार द्वारा प्रायोजित है जिसमें संविधान द्वारा महिलाओं को प्रदान किये गये कानून की जानकारी न होने से उनके साथ अत्याचार एवं उत्पीड़न जैसी घटना घटित होती है, जिसे दूर करने में विषय विशेषज्ञों द्वारा संवेदनशील मुद्दों में चर्चा किया जायेगा। महिला उत्पीड़न के अधिकांश मामलों में महिलाओं को समुचित न्याय नहीं मिल पाता है। कार्यशाला के मुख्य अतिथि पद््््मश्री फूलबासन यादव ने कहा कि कानूनी बातें अपनी जगह पर है पर महिलाओं का सबसे बड़ा दुश्मन उनका डर है। उन्हें एक जुटता के साथ हर तरह की समस्याओं का सामना करने के लिए तैयार होना चाहिए साथ ही जरुरी है की हम सभी मिलकर बच्चों में अच्छे संस्कार पैदा करे हम यदि संगठित रहेंगे तो समाज में होने वाले महिला अत्याचार एवं कई गंभीर अपराधों की रोकथाम किया जा सकता है। आज महिलाओं को जागरुक एवं संगठित होने की जरुरत है और यह कार्यशाला का उददेश्य वहीं है। इस अवसर पर विषय विशेषज्ञ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुरेशा चैबे ने कहा कि महिलाओं को अपने सम्मान की रक्षा करने के लिए स्वयं को मजबूत करना होगा, जो महिला अपनी रक्षा स्वयं नहीं कर सकती है वह अपने समाज या देश के लिए कुछ नहीं कर सकती है। प्रसंगवश महिला उत्पीड़न के संदर्भ में आपने कहा कि नारी प्रगति की सबसे सुंदर रचना है। इसकी रक्षा एवं सुरक्षा को लेकर चिंतित होना जरुरी है। कार्यशाला को विषय विशेषज्ञ शरद श्रीवास्तव ने कार्यस्थल में महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न निवारण कानून पर अपना प्रजेन्टेशन प्रस्तुत करते हुए बताया कि समाज में यह बहुत बडी विडंबना है कि हमारे समाज में महिला, पुरुष का भेद होने केे साथ साथ उनके साथ हमारे या उनके परिवार के नजदीकी सदस्यों द्वारा शोषण किया जाता है। छोटे-छोटे बच्चियों के साथ यौनिक घटना एवं बलात्कार जैसी घटना घटित होती है। परिवार का सगा बच्चियों को प्यार के बहाने ऐसी हरकतों को अंजाम देता है। गुड टच एवं बैड टच की जानकारी बच्चियों को नहीं होती है। इस सोच को हमें बदलना है और सकारात्मक परिवर्तन लाना है। कार्यशाला के समापन सत्र् में जिला विधिक प्राधिकरण सचिव श्री प्रवीण मिश्रा (न्यायाधीश) ने घरेलू हिंसा महिला उत्पीडऩ और कारखाना अधिनियम आदि से जुडे वैधानिक पहलूओं का उल्लेख किया । इस अवसर पर उन्होने कहा कि श्रम कानून के अंतर्गत सामाजिक संवेदना के साथ उन पर होने वाले कार्यस्थल पर उत्पीडन एवं उनके अधिकारों से परिचित कराना तथा कार्यस्थल कानून द्वारा उन्हें प्राप्त अधिकारों के प्रति जागरुक करने से इस समस्या का समाधान संभव है। जिला विधिक प्राधिकरण हमेशा सहायता के लिए तत्पर है। आज के इस कार्यशाला का सार्थकता तभी होगी जब हम समाज के हर उस महिला को जागरुक करें जो कार्य या घरों में रहकर देखभाल करती है। छात्रों के जिज्ञासा को विशेषज्ञों द्वारा उत्तर देकर शांत किया गया। इस अवसर पर नेहा गुप्ता द्वारा मोनो प्ले किया गया, जिसमें महिला उत्पीड़न के दर्द को बताया गया साथ ही समाजकार्य विभाग के विद्यार्थियों द्वारा नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया जिसका संदेश महिला हिंसा, अत्याचार, भेदभाव आदि बतलाना था। कार्यशाला में 200 से अधिक विद्यार्थियों ने तथा 36 महिला स्व-सहायता समूह की बहनों ने अपना पंजीयन कराया। महाविद्यालय के इतिहास विभाग एवं समाजकार्य विभाग (एमएसडब्ल्यू) के संयुक्त तत्वाधान में यह राष्ट्रीय कार्यशाला विधिक जागरुकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संरक्षक डाॅ. बी.एन. मेश्राम आयोजन सचिव डाॅ. शैलेन्द्र सिंह इतिहास विभाग एवं आयोजन सह-सचिव श्री विजय मानिकपुरी समाजकार्य विभाग रहे। कार्यक्रम के मूल उद्देश्य के संबंध में डाॅ. शैलेन्द्र सिंह ने कहा कि भारत सरकार की महत्वकांक्षी योजना महिला उत्थान एवं जागरुकता है, जिसमें जन-जागृति लाना है। कार्यक्रम का आयोजन इसलिए किया गया है। समाजकार्य के विजय मानिकपुरी ने कहा कि राष्ट्रीय महिला आयोग भारत सरकार द्वारा प्रायोजित कार्यशाला समाज के महिला अधिकारों एवं उनके साथ होने वाले अत्याचार उत्पीड़न के प्रति जागरुक करने के लिए यह आयोजन है। डाॅ. ए.के. मण्डावी ने कहा कि ऐसे आयोजन से जन-जागृति आयेगी। कार्यशाला का सफल संचालक प्रो. विजय मानिकपुरी किया और धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. नीलू श्रीवास्तव द्वारा किया गया। कार्यशाला में डाॅ. अंजना ठाकुर, डाॅ. डी.पी. कुर्रे, डाॅ. एच.एस. भाटिया, डाॅ. एस.एम. राय, डाॅ. के.एन. प्रसाद, डाॅ. एच.एस. अलरेजा, डाॅ. बी.एन. जागृत, डाॅ. मीना प्रसाद, डाॅ. अनिता शंकर सहित सभी प्राध्यापकगण एवं महाविद्यालय समस्त स्टॅाफ उपस्थित रहे।

दिग्विजय महाविद्यालय में उद्यमिता विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक जारी

शासकीय दिग्विजय महा. की प्राचार्य डा­­. श्रीमती बी.एन. मेश्राम के दिशा निर्देशन एवं रोजगार एवं मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के तत्वाधान में दिनांक 04.02.2021 को प्रारंभ हुआ। भोज्य पदार्थो एवं फलो का परिरक्षण इस वर्ष के कार्यक्रम का मुख्य विषय था।
इस आनलाईन कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य यह था कि ऐसे सभी छात्र छात्रायें महाविद्यालय में अध्ययन के पश्चात नौकरी प्राप्त नही कर पाते ऐसे छात्रों को लघु उद्योग स्थापित करनें के लिए प्रेरित करना । इस कार्यक्रम के दौरान लघु उद्योग एवं उससे संबधित संसाधन, सरकारी योजनाएॅ तथा उनका प्रबंध पर सूक्ष्मता पूर्वक जानकारी दी गई। विषय विषेषज्ञ के रूप में प्रो. व्ही. वाई. जोगलेकर ,श्रीमती सुभदा जोगलेकर, हेमन्त नाईक एवं श्री दिनेश सिंह ने छात्र छात्राओं को स्वरोजगार से संबधित महत्वपूर्ण जानकारीयां प्रदान की। इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण श्री परदेशी महानंद जो छत्तीगसढ के जाने माने फल एवं खाद्य पदार्थ परिरक्षण के विषय विशेषज्ञ है के द्वारा संपन्न तीन दिवसीय वर्कशाप में छात्र छात्राओं को खाद्य पदार्थो और फलो के द्वारा बनाये गये विभिन्न प्रकार के खाद्य सामग्रीयों जैसे जैम, जेली , अचार , सास, स्कवैश एवं शरबत के बनाने का प्रशिक्षण दिया गया।
ज्ञातव्य हो कि इस उद्यमिता विकास प्रशिक्षण के कार्यक्रम में शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय के विज्ञान विषय के स्नातक के कुल 30छात्र छात्राओं ने अपनी सहभागिता दी। इस कार्यक्रम में छात्रों ने प्रशिक्षण पूर्ण होने के पश्चात स्वयं का उद्योग कैसे स्थापित किया जाए इस पर विस्तार से जानकारी प्राप्त की। कार्यक्रम में लगातार इस विषय पर उद्योग क्षेत्र एवं उद्योग विभाग से जुड़े हुए विषय विशेषज्ञो एवं अधिकारीयों नें छात्रों को प्रशिक्षण प्रदान किया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के अवसर पर अपने विचार प्रकट करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य डाॅ. बी.एन.मेश्राम ने रोजगार एवं मार्गदर्षन प्रकोष्ठ के तत्वाधान में संपन्न हुए इस उद्यमिता विकास कार्यक्रम की प्रशंसा की और समिति के सदस्योें एवं छात्र छात्राओं को बधाई एवं शुभकामनायें प्रेषित करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम छात्रों में स्वरोजगार की प्रेरणा देते है और बेरोजगारी की समस्या को हल करनें में सहायक सिद्ध होते है। उन्होने छात्र छात्राओं से कहा कि वें सिर्फ नौकरी की तलाश न करें बल्कि स्वयं का उद्योग स्थापित कर जरूरतमंदो को रोजगार भी प्रदान करें। इस सपंूर्ण कार्यक्रम के दौरान कार्यक्रम के संयोजक श्री दीपक गायकवाड एंव रोजगार एवं मार्गदर्षन प्रकोष्ठ के सहायक श्री रवि साहू सक्रिय रूप से इस कार्यक्रम का सचांलन एवं प्रबंध किया और छात्र छात्राओं को मार्गदर्षन प्रदान किया। प्रकोष्ठ के संयोजक डा. संजय ठिसके ने जानकारी देते हुये बताया कि सिटकान (छत्तीसगढ इंडस्ट्रियल एण्ड टेक्निकल कन्सलटेन्सी सेंटर रायपुर) का सहयोग इस प्रकार के कार्यक्रमों के आयोजन 2015.16 से लगातार किया जा रहा है महाविद्यालय के कई छात्र छात्राओं ने इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों का भरपूर लाभ उठाया है कार्यक्रम के अंत में छात्र छात्राओं को वर्कशाप आयोजन के पश्चात प्रमाणपत्र देकर लाभान्वित किया जात है। इस कार्यक्रम में रोजगार एवं मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के सदस्य डाॅ. शैलेन्द्र सिंह, डाॅ. के. एन. प्रसाद, डाॅ. एच. एस. अलरेजा, महाविद्यालय के रजिस्ट्र्रार श्री दीपक कुमार परगनिया , प्रो. विकास काडें ,प्रो. हिरेन्द्र ठाकुर एवं श्री रवि साहू उपस्थित थे।

इतिहास विभाग में मनाया गया सुभाषचंद्र बोस जयंती

शासकीय दिग्विजय महा. के इतिहास विभाग में प्राचार्य डॉ. बी.एन. मेश्राम के मार्गदर्शन में सुभाषचंद्र बोस जयंती मनाई गई। इस अवसर पर डॉ. संजय ठिसके द्वारा सुभाषचंद्र बोस जी की जीवनी पर प्रकाश डाला गया तथा बताया गया कि वे आई. सी. एस. की परीक्षा देने इंग्लैंड गए थे तथा सफल भी हुए थे। भूगोल के विभागाध्यक्ष डॉ. के. एन. प्रसाद ने कहां की 1925 में बंगाल अराजक आदेश के अंतर्गत उन्हें माण्डले जेल भेज दिया गया। जेल से छूटने पर वे रचनात्मक कार्यो में लग गए,उन्होंने खादी का प्रचार, छात्र युवक संघो का संगठन और राष्ट्रीय स्कूल एवं कॉलेजो की स्थापना का कार्य करने लगे। विभागाध्यक्ष डॉ. शैलेन्द्र सिंह ने कहां की सुभाषचंद्र बोस एक वीर और साहसी पुरुष थे। उन्होंने आजाद हिंद फौज का संगठन कर अपार साहस और उत्साह का परिचय दिया, उन्होंने कठिन प्रयास से सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि पूर्वी एशिया में समस्त भारतीयों में एक नवीन स्फूर्ति का संचार किया कार्यक्रम का संचालन करते हुए प्रो. हिरेंद्र बहादुर ठाकुर ने कहा कि उनकी यह धारणा था, कि भारत की स्वतंत्रता बाहय शक्तियों की सहायता और शस्त्र द्वारा ही प्राप्त हो सकता है।वे क्रांतिकारी थे। इस अवसर पर एम. ए. की छात्रा गुलशन साहू ने भी अपने विचार व्यक्त किया।

स्वशासी विस्तार के लिए यूजीसी टीम ने किया दिग्विजय काॅलेज का मूल्यांकन

स्वशासी विस्तार के लिए यूजीसी टीम ने किया दिग्विजय काॅलेज का मूल्यांकन

शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय के स्वशासी विस्तार के लिए यूजीसी द्वारा गठित चार सदस्यीय समिति ने निरीक्षण-मूल्यांकन कर अपना प्रतिवेदन यूजीसी को भेज दिया है। इस प्रतिवेदन के आधार पर ही महाविद्यालय को अगले पांच वर्षों के लिए पुनः स्वशासी अधिकार मिलने की संभावना व्यक्त की जा रही है। देश के जानेमाने इतिहासकार डाॅ. ए. के मित्तल, कुलपति बाबू बनारसी दास विश्वविद्यालय, लखनउ की अध्यक्षता में गठित इस समिति में अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, भोपाल के भूगोल विभाग के अध्यक्ष डाॅ. विजय कुमार सिंह और यूजीसी को-आॅर्डिनेटर श्री अशोक कुमार गर्ग शामिल थे। क्षेत्रीय अपर संचालक, उच्च शिक्षा डाॅ. सुशील चंद्र तिवारी छत्तीसगढ़ शासन की ओर से प्रतिनिधित्व कर रहे थे।
इस संबंध में प्राचार्य डाॅ. बी.एन. मेश्राम ने बताया कि महाविद्यालय के स्वशासी विस्तार के लिए यूजीसी द्वारा गठित समिति ने दो दिन तक महाविद्यालय के विगत पांच वर्षों की उपलब्धियों का अवलोकन और मूल्यांकन किया है। इस मूूल्यांकन में अध्ययन, अध्यापन तथा अनुसंधान सहित परिसर विस्तार, छात्रावास, खेल मैदान, व्यायामशाला, प्रयोगशाला, ग्रंथालय, रोजगार एवं प्लेसमेंट, कौशल प्रशिक्षण और नूतन तकनीक से युक्त अध्यापन शैली की गतिविधयां शामिल थीं। साथ ही स्वशासी निकाय के अधीन संचालित परीक्षा प्रणाली और उसकी वित्तीय व्यवस्था से संबंधित कार्यप्रणाली का मूल्यांकन किया गया है।
उल्लेखनीय है कि दिग्विजय महाविद्यालय को सत्र 1992-93 से स्वशासी महाविद्यालय का दर्जा प्राप्त है। महाविद्यालय को यह स्वायत्त अधिकार उसकी पांच वर्षीय उपलब्धियों के आधार पर प्रदान किया जाता है। प्राचार्य ने बताया कि समिति महाविद्यालय की पंचवर्षीय उपलब्धियों से संतुष्ट होकर गई है। आपने आगे बताया कि यूजीसी समिति ने महाविद्यालय के दो दिवसीय अवलोकन में शैक्षणिक एवं कार्यालयीन स्टाॅफ सहित एल्युमनी, जनभागीदारी समिति, तथा छात्र-छात्राओं से अलग-अलग मुलाकात कर महाविद्यालय की गतिविधियों का मूल्यांकन किया है।
एल्युमनी सदस्यों में पूर्व प्राचार्य डाॅ. हेमलता मोहबे, जनभागीदारी समिति अध्यक्ष श्री रईस अहमद शकील, आनंद सारथी, रशीद खान, श्रीमती शारदा तिवारी, श्रीमती वर्षा अग्रवाल, श्री इब्राहीम भाई, सूरज खंडेलवाल , श्री विकास गजभिये, श्री अरविन्द ठक्कर, डाॅ. ए. एन माखिजा, श्री आलोक जोशी, डाॅ.कैलाश देवागन, डाॅ.बी.एन. जागृत आदि उपस्थित थे।
समिति के महाविद्यालय परिसर में उपस्थिति के समय पारंपरिक ढंग से एनसीसी कैडेट्स द्वारा गार्ड आॅफ आॅनर देकर तथा शंखनाद कर स्वागत किया गया। महाविद्यालय के छात्र-छा़त्राओं ने समिति के समक्ष सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी जिसकी सराहना समिति द्वारा की गई।