रिसर्च मेथोडोलॉजी में 5 दिवसीय कार्यशाला (07.06.2022 से 11.06.2022) का शुभारंभ

शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ के.एल टांडेकर के कुशल मार्गदर्शन एवं डॉ अनीता शंकर , विभागाध्यक्ष अंग्रेजी विभाग के नेतृत्व में आज दिनांक 07.06.2022, मंगलवार को शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय राजनांदगाव के अंग्रेजी विभाग एवं इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ के संयुक्त तत्वाधान में 5 दिवसीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है। 5 दिवसीय कार्यशाला के उद्धघाटन समारोह में माननीय कुलपति, हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग, छत्तीसगढ़, डॉ अरुणा पलटा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुई। अपने आशीर्वचन में उन्होंने संस्था के द्वारा रिसर्च की दिशा में किये गए इस प्रयास की सराहना की। उन्होंने मुख्य वक्ताओं के चयन की भी सराहना की और कहा कि समस्त वक्ता रिसर्च के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त वक्ता हैं और प्रतिभागियों को निश्चय ही इनके व्याख्यान से लाभ होगा। कुलपति महोदया ने वर्चुअल सरस्वती वंदना एवं राजगीत से की गयी शुरुआत की भी सराहना की एवं प्राचार्य डॉ के.एल टांडेकर की उन वर्चुअल प्रार्थनाओ में उपस्थिति को भी सराहा।
कार्यशाला की शुरुआत संस्था प्रमुख प्राचार्य डॉ के.एल टांडेकर के द्वारा सरस्वती माँ की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुई। उसके पश्चात राज्यगीत, स्वयं प्राचार्य डॉ के.एल टांडेकर, रजिस्ट्रार श्री दीपक परगनिहा एवं अंग्रेजी विभाग के प्राध्यापको के द्वारा किया गया। तत्पश्चात दोनों ही संस्थाओ के गौरवशाली इतिहास एवं वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में उनके स्थान से सम्बंधित एक सूक्ष्म वीडियो के माध्यम से प्रतिभागियों को संस्था से अवगत कराया गया।
विभाग प्रमुख डॉ अनीता शंकर ने अपने स्वागत उद्बोधन में इस 5 दिवसीय कार्यशाला हेतु आमंत्रित समस्त वक्ताओं से प्रतिभागियों को परिचित कराया एवं समस्त वक्ताओं तथा प्रतिभागियों का स्वागत किया। खैरागढ़ विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ आई.डी तिवारी ने इस संयुक्त तत्वाधान में आयोजित कार्यशाला की विशेषताओं तथा रिसर्च के महत्व पर प्रकाश डालते हुए समस्त प्रतिभागियों एवं वक्ताओं का स्वागत किया।
डॉ नीलू श्रीवास्तव, सहायक प्राध्यापक, अंग्रेजी विभाग , शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय ने अपने परिचयात्मक वक्तव्य में रिसर्च के अर्थ , प्रकार एवं समाज के उत्थान में इसके महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यशाला में आने वाले समस्त विषयो से प्रतिभागियों को अवगत कराया।
प्राचार्य डॉ के.एल टांडेकर ने अपने उद्बोधन में इस कार्यशाला की उपयोगिता का समर्थन किया और प्रतिभागियों से निवेदन किया कि यदि वो इन राष्ट्रीय – अंतर्राष्ट्रीय स्तर के वक्ताओं के व्याख्याताओ का लाभ उठाना चाहते हैं तो उन्हें ध्यानपूर्वक इस कार्यशाला को सुनना होगा एवं इसे परस्पर संवादात्मक बनाकर सफल बनाना होगा।
मुख्या वक्ता डॉ प्रान्तिक बैनर्जी ने अपने उद्बोधन में पावर पॉइंट प्रोजेक्शन के माध्यम से “Are You a Paper Tiger”  विषय पर व्याख्यान दिया। अपने व्याख्यान में उन्होंने शोधार्थियों के समक्ष आने वाली समस्याओ को सूक्ष्मता से डील किया। विषय चयन से लेकर रिसर्च प्राविधि , एवं एक अच्छे शोधार्थी द्वारा शोध पत्र लेखन में आने वाली समस्त आवश्यक बिन्दुओ पर प्रकाश डाला। उन्होंने नवीन शोधार्थियों से आग्रह किया कि वे साहित्य की पुस्तको तक सीमित न रहे एवं प्रत्येक लेख , बैनर , पोस्टर, ट्विटर , व्हाट्सएप , फेसबुक , वेब सीरीज , इत्यादि पर शोध किया जा सकता है।
डॉ आई डी तिवारी सर ने अपने उद्बोधन में विस्तार से शोध के महत्त्व , उद्देश्य , गुणधर्म पर प्रकाश डाला। उन्होंने विश्लेषणात्मक शोध एवं शोध में प्रेरणा पर भी चर्चा की स एम ए अंग्रेजी की छात्रा कु ऐश्वर्या श्रीवास्तवा एवं आर्या साहू ने वक्ताओं का संछिप्त परिचय दिया स कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ अनीता साहा एवं धन्यवाद ज्ञापन सुश्री मंजरी सिंह ने किया।