इतिहास विभाग एवं एन.सी.सी. के संयुक्त सत्वावधान में मनाया गया सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती

डाॅ. बी.एन. मेश्राम प्राचार्य, शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय, राजनांदगांव के मार्गदर्शन में सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती इतिहास विभाग एवं एन.सी.सी. के संयुक्त सत्वावधान में मनाया गया। प्रारंभ में सरदार पटेल की जीवनी एवं कार्यो पर छात्रगण बुद्धराज एवं स्वरुप देवांगन द्वारा प्रकाश डाला गया। इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. शैलेन्द्र सिंह ने कहा कि भारतीय की एकता और अखंडता को बनाए रखने में सरदार पटेल का महत्वपूर्ण योगदान है। 1910 में सरदार पटेल ने लंदन से बैरिस्टर की उपाधि प्राप्त की थी। बाद में वे महात्मा गांधी से प्रभावित होकर राष्ट्रीय आंदोलन से जुट गये। भारतीय रियासत के एकीकरण में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। भारत को स्वतंत्रता प्राप्ती के बाद देशी राज्यों की समस्या वास्तव में बड़ी विकट थी। पर सरदार पटेल ने चार-पांच महीने के भीतर 3 रियासतों को छोडकर सभी का भारतीय राष्ट्र में सम्मिलित होने को राजी कर लिया था। प्रो. हीरेन्द्र बहादूर ठाकुर ने कहा कि हैदराबाद, जुनागढ़ और कश्मीर को भारतीय संघ में सम्मिलित करने के लिए सरदार पटेल ने जिस दृढता का परिचय दिया वह इतिहास के पन्नों पर दर्ज है। सरदार पटेल को लौह पुरुष कहा गया उनका जीवन प्रत्येक मनुष्यों के लिए आदर्श उपस्थित करता है। कार्यक्रम का संचालन एम.ए. तृतीय सेमेस्टर के छात्र टोमेश्वर द्वारा किया गया। इस अवसर पर प्रो. हेमलता साहू, एन.सी.सी. के छात्र/छात्राएं, एम.ए. इतिहास के छात्र/छात्राएं उपस्थित थे। अंत में डाॅ. शैलेन्द्र सिंह द्वारा समस्त छात्र/छात्राओं को एकता एवं अखण्डता बनाए रखने हेतु शपथ दिलाई गई।