दिग्विजय में राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर परिचर्चा

डा. कस्तुरी रंगराजन की अध्यक्षता में बनी राष्ट्रिय शिक्षा नीति 2019 प्रारूप पर दिग्विजय महाविद्यालय में एक परिचर्चा आयोजित की गई। महाविद्यालय की रूसा इकाई द्वारा आयोजित इस परिचर्चा में प्रभारी प्राचार्य डा. अनिता महेश्वर की अध्यक्षता में प्राध्यापको ने अपने विचार प्रस्तुत किये।
रूसा प्रभारी एवं संयोजक डा. के.एन.प्रसाद ने पावर प्वांइट प्रदर्शन के द्वारा नई शिक्षा नीति के प्रारूप पर संक्षेप में प्रकाश डाला। तत्पश्चात प्राध्यापकों के सुझाव आमंत्रित किये गये।
हिन्दी के प्राध्यापक डा. शंकर मुनी राय ने कहा कि उच्च शिक्षा का संपुर्ण वित्तीय भार केन्द्र शासन को स्वयं वहन करना चाहिये न कि राज्य सरकारो पर इसका बोझ पडे। डा. कुर्रे प्राध्यापक अर्थशास्त्र है ने बताया कि दूरस्थ शिक्षण प्रणाली के कारण छात्रो की शिक्षण गुणवत्ता में गिरावट देखी जा रही है इसका प्रबंधन इग्नु की तरह व्यवस्थित होना चाहिये।
शिक्षक छात्र अनुपात शिक्षण की गुणवत्ता में बाधक है। कई महाविद्यालयों में एक ही शिक्षक पर सौ से दो सौ छात्रों की जिम्मेदारी होती है। यह विचार प्राणीशास्त्र के प्राध्यापक डा. संजय ठिसके ने प्रस्तुत किये।
डा. शैलेन्द्र सिंह ने कहा कि शिक्षण गुणवत्ता के मानक तरीको को न केवल कडाई से लागु किया जाये बल्की समय समय पर इसकी पारदर्शी मानीटरीेंग भी होनी चाहिये। नियमित शिक्षको की नियुक्ति भी शिक्षण व्यवस्था की गिरती गुणवत्ता के लिये काफी हद तक जिम्मेदार है। अतः स्कुल एवं महाविद्यालय स्तर पर शिक्षको की संख्या पर्याप्त होनी चाहिये।
परिचर्चा का समापन करते हुये डा. प्रसाद नें स्नातकोत्तर स्तर पर शोधपरक पाठ्यक्रम की अनिवार्यता को आवश्यक बताया और कहा कि इससे विद्यार्थियों में तथ्यों का संकलन ,प्रोसेेसिंग ,सारणीकरण ,वर्णन एवं विश्लेषण की क्षमता का विकास होगा और समाज को अच्छे नागरिक एवं उच्च शिक्षा में गुणवत्तापुर्ण शोधकर्ताओं की सही भागीदारी सुनिश्चित हो पायेगी।