एम. एससी. रसायन शास्त्र के विद्यार्थियों द्वारा राईस मिल का भ्रमण

शासकीय दिग्विजय महाविद्यालय राजनांदगांव के प्राचार्य डॉण् आरण् एनण् सिंह के मार्गदर्शन व रसायन शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर यूनुस रज़ा बेग के नेतृत्व में एमण्एस सीण् पूर्व व अंतिम ;रसायन शास्त्रद्ध के विद्यार्थियों के द्वारा विस्तार गतिविधि के अंतर्गत कमल राईस मिल ग्राम फरहद का भ्रमण किया गयाद्य
हम सभी जानते है की छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता हैए यहाँ धान की पैदावार अन्य फसलों की तुलना में अधिक होता है जिस कारण यहाँ का मुख्य भोजन चावल है द्य इस हेतु राजनांदगांव जिला में भारी संख्या में राईस मिल की स्थापना किया गया है द्य इसी तारतम्य में रसायन शास्त्र विभाग द्वारा राजनांदगांव शहर के समीप ग्राम फरहद में स्थापित कमल राईस मिल का भ्रमण किया गया द्य कमल राईस मिल में धान को चावल में किन किन चरणों में रूपांतरित किया जाता है इस प्रक्रिया को समझाने के लिए मशीन ऑपरेटर श्री नरसिंग निषाद द्वारा धान के छनन से लेकर चावल के अंतिम परिवर्तन को समझाया गया द्य एक बार में केवल एक ही प्रकार के धान को चावल में परिवर्तित किया जाता है द्य प्रारंभिक प्रक्रिया में धान को हौफ़र में डाला जाता है जहाँ से वह छनन कक्ष में जाता है जहाँ धान में उपस्थित अन्य प्रकार के मिश्रण जैसे लकड़ीए कंकड़ भूसा आदि को अलग करता है इसके बाद छना हुआ धानए चावल क्रशिंग कक्ष में जाता है जहाँ धान चावल में बदलना शुरू हो जाता है लगभग आधा धान चावल में बदलने के पश्चात चावल छनन कक्ष में जाता है जहाँ धान व चावल को अलग अलग कर धान को वापस चावल क्रशिंग कक्ष में भेजा जाता है और चावलए पौलिशिंग इकाई में भेजा जाता है लगभग पांच अलग अलग पालिशिंग इकाई में से होकर गुजरते समय चावल के छोटे टुकड़े ;खंडाद्ध अलग होकर पाइप से बहार निकल जाता है जिसके पश्चात चावल को अंतिम छनन इकाई में भेजा जाता है जहाँ यदि चावल के आकर का धान या अन्य कोई भी दाना मिला हुआ होगा तो अलग होकर बहार चला जाता है और हमें विशुद्ध खड़ा चावल प्राप्त होता है जिसे पैकिंग के लिए पैकिंग इकाई में भेज दिया जाता है इस प्रकार पूरी प्रक्रिया को सभी विद्यार्थियों को बताया गया द्य उक्त विस्तार गतिविधि में विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉण् प्रियंका सिंहए श्री गोकुल निषाद एवं डॉण् डाकेश्वर कुमार वर्मा ने सहयोग दिया द्य